सुल्तानपुर, फरवरी 26 -- सुलतानपुर। मौलाना अली अब्बास खान ने बताया कि रमज़ान, अल्लाह की मेहमानवाज़ी का महीना है और इस पवित्र महीने में क़ुरआन, जो मानवता के लिए सर्वोत्तम मार्गदर्शन है, एक विशेष रात शब-ए-क़द्र में नाज़िल हुआ था। इस महीने में अल्लाह अपनी असीम रहमत से इंसानियत के गुनाहों को माफ़ करने के दरवाजे खोल देता है। यह अवसर हमें अपने दिलों को शुद्ध करने, अल्लाह के करीब जाने और अपनी गलतियों के लिए तौबा करने का एहसास कराता है। रोज़ा न केवल आध्यात्मिक दृष्टि से बल्कि सामाजिक दृष्टिकोण से भी अत्यधिक महत्वपूर्ण है। यह इंसान की आत्मिक उन्नति को प्रोत्साहित करता है, उसकी इच्छाशक्ति और विश्वास को मज़बूत बनाता है, और उसे धैर्य, आभार और संयम का पाठ पढ़ाता है। रोज़ा एक ऐसी साधना है जो हमें आत्म-निरीक्षण और आत्म-संयम के अभ्यास की दिशा में मार्गदर्...