बांदा, अप्रैल 17 -- नरैनी। केन नदी के मध्य जलधारा में स्थित रनगढ़ किले को जलीय दुर्ग भी कहा जाता है। तीन सौ वर्ष पहले चरखारी नरेश द्वारा निर्माण कराया गया था। किले को राजा सैनिक छावनी की तरह प्रयोग करते थे। सैनिक यहा से पहरेदारी कर दुश्मन और लुटेरों पर नजर रखते थे। आजादी के बाद यह किला पूरी तरह उपेक्षित हो गया। यहां लगे लकड़ी के दो विशाल दरवाजे स्थानीय प्रशासन और लोगो ने मिलकर निकाल लिया था, आज भी एक दरवाजा गिरवा थाना और दूसरा पनगरा थाना में लगे हैं। वर्ष 2024 में विधायक ओममणी वर्मा के प्रयास से यहा पांच करोड़ से रिवर फ्रंट और 15 करोड़ से दुर्ग पहुंच मार्ग का उच्चीकरण एवं स्ट्रीट फर्नीचर का कार्य कराया जा रहा है। यह भी पढ़ें- हिरजीहाटिंग में जल मिशन योजना फेल, 4 साल में एक बूंद पानी नहीं रूट... इस तरह से पहुंचे..तहसील मुख्यालय से छह किलोमीटर ...