वाराणसी, अप्रैल 26 -- वाराणसी, मुख्य संवाददाता। आम धारणा है कि छायाचित्र कैमरा खींचता है। वहीं एक धारणा यह भी कि कैमरा तो महज माध्यम है। वास्तव में छायाचित्र तो उस कैमरे के पीछे खड़े व्यक्ति के मानसिक गणित का प्रतिफल होता है। यह बात विश्वविख्यात छायाकार रघु राय पर शत-प्रतिशत लागू होती थी। बनारस शहर उनके लिए किसी ग्रंथ की तरह था जिसे पढ़ने वह आते थे। अपने सुदीर्घ छायाकारी जीवन में रघु राय ने आधा दर्जन से अधिक बार बनारस में रह कर बनारस को करीब से महसूस किया। उन्होंने बनारस को जिस अंदाज में आत्मसात किया वह उनके छायाचित्रों में भी झलकता है। यह भी पढ़ें- भारत के मशहूर फोटोग्राफर रघु राय का 83 वर्ष की आयु में निधन रघु राय जब भी बनारस आते, यहां के कुछ खास छायाकारों को साथ जरूर रखते थे। काशी के छाया कलाकार अनिरुद्ध पांडेय, विवेकानंद त्रिपाठी, राज...
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