रक्तदान, महादान है तो फिर जी क्यों चुराना
भागलपुर, जून 13 -- भागलपुर, प्रधान संवाददाता। अक्सर यह कहा जाता है कि रक्तदान महादान है। इससे बढ़कर न कोई दान है और न ही पुण्य का काम। डॉक्टर भी बताते हैं कि एक स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में रक्तदान कर सकते हैं और इससे किसी व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होता है, बल्कि किसी की जिंदगी बच सकती है। यह भी पढ़ें- रक्तदान, महादान है तो फिर जी क्यों चुरानारक्तदान के प्रति जागरूकता जेएलएनएमसीएच की ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दिव्या सिंह बताती हैं कि रक्तदान के प्रति जागरूकता बढ़ी है, लेकिन अभी इसे और समग्र बनाने की जरूरत है। अब भी कई ऐसे लोग ब्लड बैंक में आते हैं जो अपने रिश्तेदारों के लिए रक्तदान करने में भी हिचकते हैं। इस सोच को बदलना महत्वपूर्ण है। शहरी परिवेश में रह रहे लोगों में रक्तदान के प्रति ज्यादा जागरूकता बढ़ी है। बावजूद इसके ब्लड बैंक में अभी...
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