रंगीन आसमान लेकिन हवा में जहर घोलते हैं पटाखें, कम आवाज का मतलब कम प्रदूषण; किस रंग में कौन सी रोशनी
नई दिल्ली, अक्टूबर 20 -- दिवाली पर आसमान में रंगीन रोशनी बिखेरने वाले पटाखे आंखों को भले ही सुकून दें, लेकिन इनकी चमक के पीछे प्रदूषण का खतरा छिपा है। रंगीन रोशनी के लिए प्रयोग होने वाली धातुओं के यौगिक हवा के साथ मिट्टी-पानी को भी प्रदूषित कर सकते हैं। पटाखों से निकलने वाली गैसें सेहत के लिए नुकसानदेह हैं। उत्तराखंड प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने लोगों से रंगीन रोशनी और तेज आवाज वाले पटाखों से परहेज करने की अपील की है।रंगों के लिए इस्तेमाल होती हैं धातुएं पटाखों में अलग-अलग रंग पैदा करने के लिए कई धातुओं के यौगिक मिलाए जाते हैं। इससे आसमान में रंगीन चमक दिखाई देती है। लेकिन इनके अवशेष प्रदूषण बढ़ा सकते हैं। इनका असर आंखों, फेफड़ों, पेट और त्वचा पर भी पड़ सकता है। यह भी पढ़ें- दशहरा मेला: परेड ग्राउंड आज जीरो जोन, इन इलाकों में बदलेंग...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.