नई दिल्ली, फरवरी 22 -- हिंदू धर्म में रंगभरी एकादशी का खास महत्व होता है। रंगभरी एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को रखा जाता है। इसे आमलकी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन आंवले के पेड़ की पूजा भी होती है। यह एक ऐसा एकादशी है, जिसमें भगवान विष्णु की नहीं बल्कि भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा अर्चना होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान शिव पहली बार माता पार्वती को गौना कराकर वाराणसी यानी काशी लेकर आए थे। इसी खुशी में काशी के लोग माता गौरा और भगवान शिव के साथ होली खेलते हैं। इसलिए इसे रंगभरी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। बाबा विश्वनाथ की नगरी काशी में इस दिन से ही होली का आगाज हो जाता है। इसलिए इस दिन भक्त रंगभरी एकादशी के दिन भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए तरह-तरह के उपाय करते हैं। चलिए भगवान शिव क...