पलामू, फरवरी 26 -- मेदिनीनगर, संवाददाता। आपसी मनमुटाव को भूलकर उमंग में डूबने का त्योहार होली की औपचारिक शुरुआत शुक्रवार को रंगभरी एकादशी से होगी। सनातन परंपरा के तहत रंगभरी एकादशी की शाम में गांव के पूर्व-दक्षिण कोने में आबादी से थोड़ी दूरी पर निर्धारित स्थल पर संबंत गाड़ने की प्रथा पलामू के अब कुछ ही गांव में जीवित है। अधिकांश गांव और शहर में अब होलिका दहन के दिन ही संबत गाड़ने और फिर पूजा कर आग प्रज्ज्वलिक करने की परंपरा है। पलामू के प्रमुख गांव के एक केतात निवासी सामाजिक कार्यकर्ता विजय चौबे ने बताया कि एकादशी की शाम में संबंत गाड़ने की परंपरा नहीं रह गई है। उनके गांव में अब त्रयोदशी की शाम में संबत गाड़ने की परंपरा प्रारंभ हो गई है। परंतु एकादशी के दिन पारंपरिक रूप से पांच टहनियों वाला सेमल, पलाश या अरंडी की डाली या पौधे को चिह्नित क...
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