वाराणसी, मार्च 7 -- वाराणसी, अरविन्द मिश्र। 'शब्द के संवेदना से तार जोड़ो/भावनाओं के हलक यूं मत मरोड़ो/लंबी चादर मौन की मत ओढ़ो तुम/ मौन छोड़ो...मौन छोड़ो....मौन छोड़ो...।' बनारस के एक गीतकार के गीत की इन पंक्तियों के भाव शहर के सैकड़ों रंगधर्मियों के हृदय में शुक्रवार की सुबह एक साथ स्पंदित हुए। इसका कारण बीते गुरुवार की आधी रात में चिरनिद्रा का आलिंगन कर लेने वाले रंगधर्मी मोतीलाल गुप्ता बने। आजीवन अविवाहित रहने वाले विश्व कीर्तिमानधारी रंगधर्मी मोतीलाल गुप्ता को उनके 'रंगकुल' से जुड़े स्वजनों ने मणिकर्णिका घाट पर अंतिम विदाई दी।बीएचयू अस्पताल से मणिकर्णिका घाट तक की अंतिम यात्रा में शामिल गोकुल आर्ट्स और प्रेरणा कला मंच से जुड़े कलाकार मन ही मन यही कामना करते रहे कि 'मोतीजी...., मोती भइया..., गुरुजी... आप मौन की लंबी चादर मत ओढ़िए। जैस...
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