एटा, जून 25 -- अलीगंज, मुहर्रम की नवमी तारीख पर कस्बा में गम और अकीदत का माहौल और गहरा हो गया। आठवीं मुहर्रम को निकले अलम के जुलूस के बाद गुरुवार को विभिन्न मोहल्लों में मजलिसों का सिलसिला जारी रहा, जहां करबला के मैदान में हजरत इमाम हुसैन और उनके 72 साथियों की शहादत का दर्दनाक मंजर बयान किया गया। कस्बा के मेवाती मोहल्ला, काजी मोहल्ला, सराय अगहत और आसपास के क्षेत्रों में दिनभर धार्मिक कार्यक्रम चलते रहे। वक्ताओं ने करबला की कुर्बानी को इंसानियत, सब्र और हक की लड़ाई का सबसे बड़ा पैगाम बताते हुए कहा कि इमाम हुसैन ने अन्याय के सामने झुकने के बजाय शहादत को चुना और पूरी दुनिया को सत्य व इंसाफ का रास्ता दिखाया। यह भी पढ़ें- मोहर्रम आज : सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले असामाजिक तत्वों पर होगी कठोर कार्रवाई नवमी मुहर्रम के मौके पर अकीदतमंदों ने ...