यौन उत्पीड़न के दोषी को राहत नहीं
नई दिल्ली, मई 7 -- नई दिल्ली, प्र.सं.। दिल्ली उच्च न्यायालय ने छह वर्षीय बच्ची के साथ यौन उत्पीड़न के दोषी व्यक्ति की सजा बरकरार रखी है। पीठ ने कहा कि पॉक्सो कानून के तहत यौन हमले को साबित करने के लिए हाइमेन का फटना जरूरी नहीं है। न्यायमूर्ति चंद्रशेखरन सुधा की पीठ ने यह टिप्पणी राजेन्द्र शर्मा की अपील पर सुनवाई करते हुए की। पीठ ने दोषसिद्धि को बरकरार रखा लेकिन उसकी सजा 20 साल के कठोर कारावास से घटाकर 14 साल कर दिया। अभियोजन के अनुसार 13 जनवरी, 2013 को आरोपी ने संगम विहार स्थित पीड़िता के घर में, जहां वह किरायेदार था, छह वर्षीय बच्ची का यौन उत्पीड़न किया। यह भी पढ़ें- 'यह भरोसे का कत्ल', जज स्वर्णकांता ने मौलवी को दिया झटका, 'जिन्न' भगाने के बहाने किशोरी से किया था रेप अगले दिन बच्ची के बयान के आधार पर प्राथमिकी दर्ज की गई थी।
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