नई दिल्ली, दिसम्बर 22 -- दिल्ली हाई कोर्ट ने यौन अपराधों के मामलों में पीड़ितों को मिलने वाले मुआवजे के दुरुपयोग पर चिंता जताई है। कोर्ट ने कहा कि आरोप वापस लेने या झूठे पाए जाने के मामलों में वितरित मुआवजा बिना वसूली के पड़ा रहता है। कोर्ट ने मुआवजा प्रक्रिया को प्रभावी बनाने के लिए गाइडलाइन जारी किए हैं। लाइव लॉ की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली हाई कोर्ट की जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि एफआईआर दर्ज होने के बाद पीड़ित को अंतरिम मुआवजा दिया जाता है, लेकिन बाद में पीड़ित अपने आरोपों से पीछे हट सकती है, समझौता कर सकती है या एफआईआर या कार्यवाही को रद्द करने की मांग कर सकती है। कोर्ट ने कहा कि ऐसी स्थितियों में अक्सर देखा जाता है कि पीड़ित द्वारा पहले से वितरित अंतरिम मुआवजा न तो लौटाया जाता है और न ही संबंधित विधि सेवा प्राधिकरण द्वारा इसक...
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