अंबेडकर नगर, मार्च 11 -- अम्बेडकरनगर। लोहार व बढ़ई जैसे परंपरागत पेशे से आज भी बड़ी संख्या में कारीगरों की रोजी रोटी चल रही है। हालांकि उनके जीवनस्तर में बहुत बदलाव नहीं हो पाया है। कुछ ही ऐेसे कारीगर हैं, जिन्होंने बड़े पैमाने पर बढ़ई व लोहार का कार्य कर खुद की पहचान बनाई है। जहां तक सरकारी योजनाओं की बात है तो अब तक मात्र सात सौ लोगों को ही विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना का लाभ मिल सका है। कारोबार को बढ़ाने के लिए लोन हासिल करना अभी भी एक बड़ी चुनौती बनी है। इसके लिए बार बार आवेदक को जिम्मेदार के कार्यालय से लेकर बैंक तक की दौड़ लगानी पड़ती है। लकड़ी के बढ़ते दाम पर अंकुश नहीं लग रहा है, तो आसानी से लकड़ी भी नहीं उपलब्ध हो रही है। ऐसे में दाम अधिक होने से लकड़ी से तैयार चीजों की बिक्री भी ज्यादा पैसे में होती है। बाजारों में बिकने वाले लोहे व लकड़ी के...
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