रिषिकेष, मार्च 20 -- जैन धर्म की साध्वी आर्यिका पूर्णमति माता ने कहा कि जीवन की वास्तविक सत्यता योग है। योग प्रेम, सत्य करुणा का आधार है। अध्यात्म योग मन की पवित्र तरंगों को ऊर्जावान बनाती है। ये बातें उन्होंने शुक्रवार को मुनिकीरेती स्थित गंगा रिजॉर्ट में आयोजित योग महोत्सव के दौरान साधकों को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद का रमण रहना योग है। भूत नही वर्तमान को जीना चाहिए। जीएमवीएन के प्रबंध निदेशक प्रतीक जैन ने कहा कि योग के जरिए लोगों में दया, प्रेम करुणा और सनातन संस्कृति के प्रति जागरूक करना है। वहीं, योग महोत्सव के पांचवें दिन योगाचार्यो ने अपने अपने योग के विभिन्न आयामों का दर्शन कराकर साधकों को यौगिक अभ्यास कराया। योगी जयदेवन, डॉ. विपिन जोशी, मेघा चौधरी, उषा माता, डॉ नवदीप जोशी,अजय राणा, जितानन्द, राधिका नागरथ...