हरिद्वार, अप्रैल 22 -- जगजीतपुर स्थित अमृता विश्व विद्यापीठम परिसर में 15वीं राष्ट्रीय कार्यशाला 'मानव शरीर विज्ञान-मनोविज्ञान पर योगिक-पंचकर्म चिकित्सा की प्रभावशीलता' का शुभारंभ हुआ। मुख्य अतिथि उत्तराखंड आयुर्वेद विवि के कुलपति डॉ. अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि योग और पंचकर्म भारतीय चिकित्सा पद्धति की रीढ़ हैं। आधुनिक विज्ञान के साथ इनके समन्वय से जटिल एवं असाध्य रोगों के उपचार की नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं। आयोजन अध्यक्ष डॉ. रविन्द्र कुमार ने कहा कि योग और पंचकर्म भारत की प्राचीन और गौरवशाली परंपरा के अभिन्न अंग हैं, जो आज वैश्विक स्तर पर शोध का प्रमुख विषय बन चुके हैं। कार्यक्रम की उपाध्यक्ष एवं निदेशक डॉ. उर्मिला पांडे ने कहा कि अमृता विश्व विद्यापीठम हरिद्वार परिसर 'संकल्प से सिद्धि' का प्रतीक है। कार्यशाला के सत्रों में जेएनएन...