रिषिकेष, मार्च 10 -- परमार्थ निकेतन में चल रहे सात दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय योग महोत्सव के दूसरे दिन मंगलवार को प्रतिभागियों के लिए योगाभ्यास के जरिए आध्यात्मिक ऊर्जा और ज्ञान का अनुभव किया। महोत्सव में 80 देशों के 1,500 योग साधक भारत की प्राचीन योग परम्परा हठ, अष्टांग, विन्यास, कुंडलिनी, नाड़ी योग, आयुर्वेद, प्राणायाम, ध्यान और भक्ति कीर्तन जैसी विविध परंपराओं को आत्मसात कर रहे हैं। योगाभ्यास के शुभारंभ मौके पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानंद सरस्वती ने साधकों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि योग केवल शरीर की साधना नहीं, बल्कि जीवन को बदलने वाली विज्ञान और कला है। यह हमें शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक त्रिविध संतुलन का अनुभव कराता है। ध्यान के माध्यम से हम अपने अंतरमन की गहराइयों में उतरते हैं, जहां शांति और स्थिरता का स्रोत स्वतः ज...
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