गोरखपुर, मार्च 15 -- गोरखपुर, कार्यालय संवाददाता। दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के दर्शनशास्त्र विभाग की ओर से भारतीय दार्शनिक अनुसंधान परिषद के सहयोग से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का समापन शनिवार को हुआ। जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीत गुप्त ने कहा कि सनातन और स्त्री पर बात करते हुए मध्ययुगीन परिस्थितियों पर चिंतन करना आवश्यक है। प्राचीन व्यवस्था सनातन नहीं है, अपितु सनातन वह है जो निरंतर प्रवाहमान एवं जीवंत है। उन्होंने कहा कि यूरोप को विकास का मॉडल मानने से सनातन मूल्य की समझ कमजोर हुई। यूरोप की धार्मिक मान्यताओं में स्त्री को वस्तु के रूप में चित्रित किया गया है। स्त्री की स्थिति में निराशा, विपरीत परिस्थितियों का द्योतक है। दिग्विजय नाथ पीजी कॉलेज के प्राचार्य प्रो. ओम प्रकाश सिंह ने कहा कि स्त्र...
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