मुख्य संवाददाता, दिसम्बर 8 -- उत्तराखंड में बिजली उपभोक्ताओं पर 5900 करोड़ का भार डालने की तैयारी है। ये भार शासन और ऊर्जा निगम के बीच 5900 करोड़ को लेकर खींचतान के कारण पड़ने जा रहा है। ऊर्जा निगम शासन से यूपी के समय ट्रांसफर हुई योजनाओं की एवज में मिलने वाले 5900 करोड़ का भुगतान करने की मांग कर रहा है। शासन न सिर्फ इस बजट को बिजली दरों में शामिल करने का दबाव बना रहा है। बल्कि, उल्टा ऊर्जा निगम से इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, वॉटर सेस, फ्री पावर का बकाया 6000 करोड़ रुपये मांग रहा है। यूपी से अलग होने के बाद ऊर्जा निगम को एसेट के रूप में 1058 करोड़ की योजनाएं मिलीं थी। इन योजनाओं के आधार पर ऊर्जा निगम ने विद्युत नियामक आयोग से मेंटनेंस, कैरिंग कॉस्ट, डेप्रिसिएशन का लाभ मांगा। नियामक आयोग ने पहले शासनादेश कराने के निर्देश दिए। 2012 में जाकर जीओ ह...
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