विधि संवाददाता, अक्टूबर 8 -- इलाहाबाद हाईकोर्ट ने नोएडा पुलिस द्वारा एक व्यक्ति की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को स्वीकार कर लिया। साथ ही पुलिस अधिकारियों को इस बात के लिए फटकार लगाई कि उन्होंने बंदी को हिरासत में लेने और गिरफ्तार करने का जो तरीका अपनाया, वह गैरकानूनी था। सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति अचल सचदेव की खंडपीठ ने गौतम बुद्ध नगर के सहायक पुलिस आयुक्त और एसएचओ से मौखिक रूप से कहा कि आपको शर्म आनी चाहिए। टिप्पणी की कि इस राज्य में पुलिस की हालत बेहद खराब है। अधिकारियों को लगता है कि वे कुछ भी कर सकते हैं और बच निकलेंगे। खंडपीठ गौतम बुद्ध नगर के रहने वाले दीपक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में गौतम बुद्ध नगर फेज-II थाने में दर्ज एक मामले के संबंध में उसकी...