पीलीभीत, अप्रैल 20 -- कहते हैं कि जब मन में कुछ करने की इच्छा और दृढ़ विश्वास हो तो रास्ते खुद बनते चले जाते हैं। यूपी के बरेली में ऐसा ही एक वाक्या शहर के आवास विकास कॉलोनी निवासी 31 वर्षीय सूरज सागर (राना) के साथ हुआ है। सीमित संसाधनों में पले-बढ़े सूरज ने न केवल अपनी जिंदगी की दिशा बदली, बल्कि आज वे कई परिवारों के लिए रोजगार और उम्मीद का जरिया बन चुके हैं। सूरज सागर ने आर्थिक तंगी के बावजूद चार साल पहले आईएफटीए से बीटेक की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें 30 हजार रुपये प्रतिमाह की नौकरी मिली, लेकिन यह नौकरी उनके सपनों और आत्मसंतुष्टि के अनुरूप नहीं थी। कुछ समय बाद उन्होंने साहसिक निर्णय लेते हुए नौकरी छोड़ दी और खुद का काम शुरू करने का निश्चय किया। स्टार्टअप की राह आसान नहीं थी। यह भी पढ़ें- अपर्णा के झंडा जलाने से सपाइयों में आक्रोश...