एके जैन, मई 14 -- एके जैन, पूर्व पुलिस महानिदेक, उत्तर प्रदेश अपनी बात एक सवाल के साथ शुरू करूंगा। किसी राज्य की कानून व्यवस्था को आप अपनी दृष्टि में किस आधार पर मापेंगे? थानों की संख्या, पुलिस बल के आकार या बजट आवंटन से। वस्तुतः कानून व्यवस्था के आकलन का यह पैमाना हो ही नहीं सकता। इसके आकलन का आधार उस मनोविज्ञान से होना चाहिए जो समाज के सबसे साधारण व्यक्ति के भीतर होता है कि क्या वह रात को निर्भय होकर सो सकता है, क्या वह अपनी शिकायत लेकर थाने जाने का साहस रखता है, और क्या उसे यह विश्वास है कि अपराधी को दंड मिलेगा? भयग्रस्त समाज कभी सृजनशील नहीं हो सकता। जहां असुरक्षा होती है, वहां व्यक्ति अपनी ऊर्जा विकास और रचनात्मकता में नहीं, बल्कि स्वयं को बचाने में खर्च करने लगता है। इसके विपरीत, जब नागरिक सुरक्षित महसूस करता है, तभी वह जोखिम उठाता ...