आशीष दीक्षित, अगस्त 24 -- कानपुर में स्वास्थ्य विभाग की टीम हाथ में आयुष्मान की लिस्ट लेकर घर-घर पहुंची। दरवाजा खुला तो सामने परिवार खड़ा था। टीम ने लाभार्थी का नाम पूछा तो जवाब मिला। इन्हें तो गुजरे कई साल हो गए। दूसरी जगह टीम पहुंची तो पता चला कि जिसे कार्ड देने आए हैं, वह घर ही नहीं, मोहल्ला तक छोड़ चुका है। किसी ने पांच साल पहले ठिकाना बदला, तो किसी ने दस साल पहले। कुछ नाम ऐसे भी निकले, जिनके बारे में मोहल्ले वालों ने साफ कह दिया कि इस नाम का आदमी यहां कभी रहा ही नहीं। आयुष्मान योजना की पात्र सूची का जमीनी सत्यापन शुरू हुआ तो स्वास्थ्य विभाग के सामने ऐसा ही अजब-गजब सच सामने आया है। सूची में करीब 50 हजार मृतकों के नाम अब भी दर्ज हैं। वहीं लगभग एक लाख लोग ऐसे हैं, जो दर्ज पते पर रहते ही नहीं। यानी कार्ड बनाने निकली टीम की कई जगह लाभार्थ...