युवती का गर्भाशय निकालने की अनुमति
नई दिल्ली, जून 22 -- कर्नाटक हाईकोर्ट ने गंभीर विकासात्मक और मानसिक अक्षमता से जूझ रही 23 साल की युवती की 'टोटल एब्डोमिनल हिस्टेरेक्टॉमी' करने की मंज़ूरी दे दी। कोर्ट ने माना कि यह प्रक्रिया महिला के कल्याण, स्वास्थ्य, सम्मान और सर्वोत्तम हितों को ध्यान में रखकर की जा रही है। 'टोटल एब्डोमिनल हिस्टेरेक्टॉमी' एक सर्जिकल प्रक्रिया है जिसमें पेट में चीरा लगाकर गर्भाशय और सर्विक्स (गर्भाशय ग्रीवा) को पूरी तरह से निकाल दिया जाता है। जस्टिस सूरज गोविंदराज ने 17 जून को यह आदेश युवती के माता-पिता और मुख्य देखभाल करने वालों की याचिका को मंज़ूरी देते हुए दिया। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं द्वारा बताई गई बार-बार होने वाली स्वास्थ्य दिक्कतें और मेडिकल बोर्ड की एकमत सिफारिश को ध्यान में रखते हुए, कोर्ट इस बात से संतुष्ट है कि प्रस्तावित प्रक्रिया पीड़...
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