गढ़वा, मार्च 24 -- गढ़वा, प्रतिनिधि। गर्मी के दस्तक के साथ ही शुरू हुए जलसंकट के समाधान के लिए विभागीय स्तर पर युद्ध स्तर पर खराब चापाकलों की मरम्मत का कार्य किया जा रहा है। हिन्दुस्तान की ओर से कैसे बुझेगी प्यास जब पानी ही नहीं अभियान शुरू किए जाने के बाद से चापाकलों की मरम्मत के काम में तेजी आई। जिलांतर्गत खराब पड़े 2111 चापाकलों में अबतक 631 चापाकलों को दुरूस्त कर लिया गया है। कार्यपालक अभियंता अजय कुमार सिंह ने यह जानकारी दी। उधर शहर की बड़ी आबादी पेयजल के लिए मुख्य रूप से शहरी जलापूर्ति योजना पर ही निर्भर है। उन्हीं स्रोतों से पानी शुद्धिकरण संयंत्र के जरिए शहर के विभिन्न इलाकों तक पहुंचाया जाता है। अबकी बार भी मार्च के मध्य से ही जलस्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है। उससे जलापूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। विभागीय आंकड़ों के अनुसा...