नई दिल्ली, मार्च 2 -- इतिहास साक्षी है कि युद्ध केवल तबाही का अध्याय लिखते हैं, सृजन का नहीं। यह किसी भी समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध में इस्लामिक क्रांति का चेहरा अयातुल्ला खामेनेई को बेशक मार दिया गया है, लेकिन युद्ध अब तक बंद नहीं हो सका है। खामेनेई की मौत के बाद शिया समुदाय में जबर्दस्त नाराजगी है और वह जवाबी प्रतिक्रिया देने की बात कह रहा है। इसलिए, विश्व के लिए यह चिंता का विषय है कि आखिर युद्धोन्माद से प्रभुत्ववादी शक्तियां कौन सा शांति-संदेश देना चाहती हैं? स्थिति यह है कि भारत जैसे पंथनिरपेक्ष देश में भी इस युद्ध को लेकर कड़ी प्रतिक्रिया देखने को मिली है। देश भर में शिया बाहुल्य इलाकों में प्रदर्शनकारी सड़कों पर उतर आए हैं और अमेरिका व इजरायल विरोधी नारे लगा रहे हैं। इस युद्ध के लिए क...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.