नई दिल्ली, मार्च 27 -- इंटरनेट आज के तौर में जितना 'वायरलेस' दिखता है, हकीकत में वह उतना ही केबल्स पर आधारित है। ग्लोबल डेटा ट्रैफिक का करीब 95 प्रतिशत हिस्सा समुद्र के नीचे बिछी फाइबर ऑप्टिक लाइनों यानी अंडरसी केबल्स की मदद से चलता है। भारत भी इसी नेटवर्क पर काफी हद तक, खासकर यूरोप, अमेरिका और मिडिल-ईस्ट के साथ डाटा कनेक्टिविटी के लिए निर्भर है। ऐसे में ईरान-इजराइल युद्ध के चलते मिडिल-ईस्ट में तनाव बढ़ने से इन केबल्स पर खतरा भी बढ़ गया है। इसका सीधा मतलब है कि भारत में इंटरनेट ठप हो सकता है। भारत के लिए चिंता की सबसे बड़ी वजह यह है कि उसके कई अहम इंटरनेट रूट्स मौजूदा युद्ध के चलते संवेदनशील बन चुके इलाकों जैसे- रेड सी (Red Sea) और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (Strait of Hormuz) से होकर गुजरते हैं। अगर किसी सैन्य कार्रवाई, दुर्घटना या जानबूझकर किए ...