नई दिल्ली, अगस्त 30 -- भारतीय रेलवे को देश की आम जनता की जीवन-रेखा कहा जाता है। करोड़ों यात्री रोजाना ट्रेन से सफर करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या ऐसे लोगों की है, जिन्हें कन्फर्म टिकट, साफ-सुथरे शौचालय, समय पर ट्रेन और पर्याप्त सीट जैसी सुविधाओं के लिए भी संघर्ष करना पड़ता है। ऐसे में, रेलवे के आलीशान 'सैलून' को लेकर उठा विवाद केवल एक कोच की बुकिंग तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल और वीआईपी संस्कृति की बहस से भी जुड़ता है। हाल में रेलवे बोर्ड ने निजी लोगों के उपयोग वाले सैलून कोच की बुकिंग बंद करने का निर्णय किया था। यह सुविधा अब केवल रेलवे के उच्च अधिकारियों के आधिकारिक दौरों और उपयोग के लिए ही सीमित कर दी गई है। यह वह सुविधा थी, जो राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से 2019 से आम लोगों के लिए उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन जुला...