नई दिल्ली, मार्च 10 -- तेल के वैश्विक बाजार में आई उथल-पुथल ने भारत के शहरी जीवन और अर्थव्यवस्था के सामने नया संकट खड़ा कर दिया है। जब कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर के पार पहुंचीं, तब इसका असर केवल आर्थिक आंकड़ों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में दिखने लगा है। बेंगलुरु जैसे बड़े महानगर में तो रेस्तरां भी बंद होने लगे हैं। होटल कारोबारियों का कहना है कि व्यावसायिक सिलेंडरों की आपूर्ति बाधित हो गई है और यदि यह स्थिति जल्दी नहीं सुधरी, तो शहर की खाद्य सेवाओं की निरंतरता पर गंभीर असर पड़ सकता है। यह केवल व्यापारिक समस्या नहीं, बल्कि लाखों लोगों की दैनिक भोजन व्यवस्था और हजारों कर्मचारियों के रोजगार से जुड़ा प्रश्न बन चुका है। युद्ध की आग में झुलसता मध्य-पूर्व इस संकट की वास्तविक पृष्ठभूमि है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के ब...