नई दिल्ली, जुलाई 7 -- जब विदर्भ के तेज गेंदबाज यश ठाकुर जिम्बाब्वे के आगामी दौरे के दौरान भारतीय टीम के ड्रेसिंग रूम में कदम रखेंगे तो यह किसी अनुभवहीन खिलाड़ी की कहानी नहीं होगी। यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी होगी जिसने पिछले लगभग एक दशक से घरेलू क्रिकेट में जमकर पसीना बहाया है। यह एक ऐसे खिलाड़ी की कहानी होगी जिसके पिता ने अपने बेटे को भारतीय टीम की तरफ से खेलने का सपना देखा था। अब जबकि यह सपना साकार होने के करीब है तब दुर्भाग्य से उनके पिता इसे देखने के लिए जीवित नहीं हैं। 27 वर्षीय ठाकुर को हाल ही में श्रीलंका के भारत ए दौरे से लौटने के बाद नागपुर हवाई अड्डे पर अपना सामान लेने का इंतजार करते समय शायद उनके पेशेवर जीवन का अब तक का सबसे महत्वपूर्ण फोन कॉल आया। यह फोन जिम्बाब्वे दौरे के लिए भारत की टीम में उनके पहली बार चयन की सूचना देने के ...