अलीगढ़, दिसम्बर 20 -- अलीगढ़, वरिष्ठ संवाददाता। सड़क हादसों को न्यून करने की सभी कार्रवाई कागजों तक ही सीमित है। क्योंकि यमुना एक्सप्रेस-वे पर भी हादसों को रोकने और न्यून करने को जीरो डेथ कॉरिडोर के रूप में विकसित करने करार वर्ष 2020 में किया गया था। पर पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी करार के तहत क्या काम कराए गए, यह किसी अधिकारी को नहीं पता। मुंबई पुणे एक्सप्रेसवे की तरह की यमुना एक्सप्रेसवे को भी जीरो डेथ कॉरीडोर में बदलने को करार हुआ था। पांच वर्ष में इस करार के तहत सेव लाइफ फाउंडेशन संस्था ने क्या कार्य किए यह किसी को पता नहीं। 2020 में हुए इस करार की मॉनिटरिंग के लिए एक्सप्रेस वे, आरटीओ, नेशनल हाईवे अथॉरिटी, पुलिस की संयुक्त टीम को सदस्य बनाया गया। पर पांच वर्ष बीत जाने के बाद भी इस एक्सप्रेसवे पर किस प्रकार का काम किया गया। इसकी जानकार...
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