गोड्डा, अप्रैल 24 -- यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ, संतोष सबसे बड़ा धन है:संजय कृष्ण सनेह ललमटिया प्रतिनिधि। परम पुनीत पावन वृंदावन धरा धाम से पधारे पूज्य श्री संजय कृष्ण सनेह एवं आचार्य सुजीत जी ने श्री मद भागवत कथा के अंतिम दिन गुरुवार को कथा के दौरान बताया कि मनुष्य स्वंय को भगवान बनाने के बजाय प्रभु का दास बनने का प्रयास करें, क्योंकि भक्ति भाव देख कर जब प्रभु में वात्सल्य जागता है तो वे सब कुछ छोड़ कर अपने भक्तरूपी संतान के पास दौड़े चले आते हैं। गृहस्थ जीवन में मनुष्य तनाव में जीता है, जबकि संत सद्भाव में जीता है। यदि संत नहीं बन सकते तो संतोषी बन जाओ। संतोष सबसे बड़ा धन है। चल रही श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के सातवें दिन श्रीकृष्ण भक्त एवं बाल सखा सुदामा के चरित्र का वर्णन किया। कथा के दौरान श्रीकृष्ण एवं सुदामा की मित्रत...
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