नई दिल्ली, अगस्त 29 -- जलवायु परिवर्तन की वजह से सतलुज नदी के कैचमेंट एरिया जिसमें हिमाचल प्रदेश और तिब्बत सहित ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र शामिल हैं। यहां ग्लेशियल झीलों की संख्या तेजी से बढ़ी है। सतलुज बेसिन में ग्लेशियल झीलों, खासकर मोरेन-डैम वाली झीलों के बढ़ने से ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (जीएलओएफ) से निचले इलाकों में भीषण तबाही मच सकती है। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) द्वारा नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) में पेश रिपोर्ट में ये खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार हिमाचल प्रदेश विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद द्वारा किए गए अध्य्यन का हवाला देते हुए सतलुज नदी के कैचमेंट एरिया में ग्लेशियल झीलों की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी को स्वीकार किया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि यदि झीलें फटती हैं तो निचले इलाकों में बाढ़ आ सकत...