नई दिल्ली, जुलाई 18 -- बाजार नियामक सेबी ने म्यूचुअल फंड (एमएफ) योजनाओं के वर्गीकरण की समीक्षा का प्रस्ताव रखा है। इसका मकसद योजनाओं में स्पष्टता लाने के साथ ही इसके पोर्टफोलियो में 'ओवरलैप' की स्थिति यानी दोहराव से बचाना है। निवेश पोर्टफोलियो में ओवरलैप की स्थिति उस समय बनती है जब कोई निवेशक अलग-अलग म्यूचुअल फंड या योजना में निवेश करता है, लेकिन उन फंड में अधिकतर निवेश एक ही कंपनियों या क्षेत्रों में किया गया होता है। इससे निवेश को लेकर जोखिम बढ़ जाता है।प्रस्ताव लाने की नौबत क्यों आई? भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का यह प्रस्ताव कुछ एमएफ योजनाओं में पोर्टफोलियो का 'ओवरलैप' नजर आने के बाद आया है। सेबी ने यह महसूस किया कि समान पोर्टफोलियो वाली योजनाओं से बचने के लिए स्पष्ट सीमाएं तय करने की जरूरत है। सेबी ने सुझाव दिया है कि म्...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.