कटिहार, मार्च 30 -- कटिहार, निज प्रतिनिधि मौसम में परिवर्तन व नदियों का अस्तित्व संकट में होने के कारण मौसम चक्र भी बदल रहा है। दो दशक पूर्व तक स्थानीय किसान धान की फसल तैयार होने के बाद दलहन व तिलहन की खेती कर लेते थे। नदी, जलाशय व नहर से सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी भी उपलब्ध हो जाता था। अमदाबाद एवं आजमनगर प्रखंड में दलहन की खेती खूब होती थी। सिंचाई में लागत अधिक आने से दलहन व तिलहन की खेती से किसान विमुख होने लगे। रकवा घटने के साथ ही दलहन व तिलहन की खेती अब नाम मात्र की हो रही है। इस वर्ष भी मार्च माह में दो बार आंधी व बारिश से रबी की फसल भी तैयार नहीं हो पाई है। दियारा इलाके में रबी सीजन के मक्का व अन्य फसल तैयार होने के बाद किसान अपने खेतों में सब्जी की खेती भी करते हैं। मनिहारी, बरारी व प्राणपुर का दियारा इलाका सब्जी की खेती के लिए ज...