छपरा, अप्रैल 18 -- बेमौसम बारिश, ओलावृष्टि, सूखा और बाढ़ के बीच सारण के किसान हर मौसम में झेल रहे संकट फोटो: 4 अमनौर में सूख चुकी मही नदी का दृश्य। छपरा, हिन्दुस्तान संवाददाता। जलवायु परिवर्तन का असर अब केवल चर्चा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि खेत-खलिहानों की सच्चाई बन चुका है। सारण जिले में मौसम की अनिश्चितता ने खेती-किसानी को सबसे ज्यादा प्रभावित किया है। कभी मार्च-अप्रैल में बेमौसम बारिश गेहूं की तैयार फसल गिरा देती है, तो कभी तेज आंधी और ओलावृष्टि आम, लीची, सब्जी और दलहन फसलों को भारी नुकसान पहुंचाती है। बरसात के मौसम में कहीं सूखे जैसी स्थिति बनती है तो कहीं कुछ दिनों की तेज बारिश से खेत जलमग्न हो जाते हैं। यह भी पढ़ें- जलवायु परिवर्तन का असर, खेती पर गहराता संकट इससे किसानों की लागत बढ़ रही है, उत्पादन घट रहा है और खेती जोखिम भरा प...
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