सीवान, अप्रैल 19 -- (सीवान से नीरज कुमार पाठक)। जलवायु परिवर्तन के असर ने खेती-किसानी की पारंपरिक व्यवस्था को गहराई से प्रभावित किया है। मौसम की अनिश्चितता अब किसानों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। कभी बेमौसम बारिश, तो कभी सूखा, ओलावृष्टि और तेज - आंधी जैसी घटनाएं फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही हैं। धान, गेहूं, मक्का, दलहन और तेलहन जैसी प्रमुख फसलें इससे सीधे तौर पर प्रभावित हो रही हैं, जिससे उत्पादन में गिरावट और किसानों की आय पर संकट गहराता जा रहा है। धान की खेती पूरी तरह पानी और मौसम पर निर्भर होती है। पहले जहां मानसून का समय लगभग तय रहता था, वहीं अब बारिश अनियमित हो गई है। यह भी पढ़ें- जलवायु अनुकूल खेती को अपनाकर लाभ कमा सकते हैं किसान कई बार रोपाई के समय पानी की कमी हो जाती है, तो कभी कटाई के समय अचानक बारिश फसल को बर्बाद...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.