लखनऊ, जुलाई 5 -- बीकेटी के कठवारा निवासी 75 वर्षीय मंगल ने मृत्यु के बाद भी मानवता की अनूठी मिसाल पेश की है। शनिवार को लंबी बीमारी के निधन के बाद उनका वर्षों पुराना संकल्प पूरा हुआ। 2013 में देहदान का पंजीकरण कराने वाले मंगल का पार्थिव शरीर अब केजीएमयू के मेडिकल छात्रों की पढ़ाई और चिकित्सा अनुसंधान के काम आएगा। परिजनों के अनुसार मंगल का मानना था कि शरीर का अंतिम संस्कार करने के बजाय यदि वह चिकित्सा शिक्षा में काम आए, तो यह सबसे बड़ी समाज सेवा है। उनकी मृत्यु के बाद केजीएमयू की टीम ने उनके घर पहुंचकर सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी कर पार्थिव शरीर को सम्मानपूर्वक ले गई। उनके इस साहसी और प्रेरणादायी निर्णय की पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है। ग्रामीणों ने बताया कि यह कदम समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने के साथ-साथ दूसरों को प्रेरणा देगा...