नई दिल्ली, मार्च 12 -- इयान ब्रेमर, संस्थापक, यूरेशिया ग्रुप फाउंडेशन अपने मित्र देशों के बीच अमेरिका अब वह मुल्क नहीं रहा, जो सामूहिक सुरक्षा, मुक्त व्यापार और कानून के शासन का समर्थक था। वहीं, चीन का आर्थिक व राजनीतिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है, जिससे बीजिंग से रचनात्मक संबंधों पर निर्भर कई देशों में अविश्वास बढ़ गया है। अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर अमेरिका और चीन के प्रभुत्व वाले इस दौर में, और रूस द्वारा इस व्यवस्था को पलटने की प्रतिबद्धता को देखते हुए, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने जनवरी में चेतावनी दी थी कि 'मध्य शक्तियों को मिलकर काम करना चाहिए, क्योंकि यदि वे सक्रियता नहीं दिखाएंगी, तो महाशक्तियों का शिकार बन जाएंगी'। मध्य शक्तियां उन देशों को कहा जाता है, जो महाशक्ति नहीं हैं, पर विश्व राजनीति को प्रभावित करने की क्षमता रखते ह...
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