मौखिक गवाह के बिना विभागीय कार्रवाई अवैध: हाईकोर्ट
रांची, जुलाई 8 -- रांची, विशेष संवाददाता। झारखंड हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई में केवल दस्तावेजों के आधार पर कर्मचारी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। आरोपों को साबित करने के लिए मौखिक गवाहों का परीक्षण आवश्यक है। इसी आधार पर अदालत ने जल संसाधन विभाग के सेवानिवृत्त कर्मचारी कृष्णानंद ठाकुर की सेवा से बर्खास्तगी और विभागीय अपील खारिज करने के आदेश को रद्द कर दिया। जस्टिस दीपक रोशन की अदालत ने यह आदेश कृष्णानंद ठाकुर की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। याचिकाकर्ता ने वर्ष 2024 में जारी बर्खास्तगी के आदेश और वर्ष 2025 में विभागीय अपील खारिज किए जाने के आदेश को चुनौती दी थी। यह भी पढ़ें- विभागीय परीक्षा नहीं बन सकती एसीपी में बाधा : कोर्ट अदालत ने पाया कि विभागीय जांच के दौरान आरोपों को साबित करन...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.