वाराणसी, अप्रैल 28 -- वाराणसी। मोहिनी एकादशी पर सोमवार की मध्यरात्रि में काशी की उत्तरवाहिनी गंगा कुछ समय के लिए क्षीर सागर में परिवर्तित हो गईं। प्रह्लाद घाट के सामने गंगा की धार पर बजड़े को शेषनाग का स्वरूप प्रदान किया गया। उसके फन के नीचे भगवान श्रीहरि विष्णु ने ऋषि-मुनियों को दर्शन दिए। ऋषिगण के अनुनय पर प्राकृतिक तेज हवा के झोंकों के बीच आकाशवाणी हुई। श्रीहरि नारायण ने ऋषिगण को आश्वस्त किया। बोले आप सब निश्चिंत रहें। मैं अवतार लूंगा और दानवों से आप सब की रक्षा करूंगा। यह सब कुछ एक हजार साल से भी अधिक पुरानी श्रीनृसिंह लीला के प्रथम प्रसंग में हुआ। यह भी पढ़ें- मोहिनी एकादशी पर उमड़ता रहा भक्तों का सैलाब रात्रि में लीला का आरंभ ऋषियों की क्षीरसागर यात्रा के प्रसंग को जीवंतता मिली। ऋषिगण जब श्रीहरि के दर्शन को पहुंचे तो भगवान के द्वारप...
Click here to read full article from source
इस लेख के रीप्रिंट को खरीदने या इस प्रकाशन का पूरा फ़ीड प्राप्त करने के लिए, कृपया
हमे संपर्क करें.