वाराणसी, अप्रैल 28 -- वाराणसी। मोहिनी एकादशी के अवसर पर सोमवार को अस्सी स्थित दक्षिणामूर्ति मठ में विष्णु सहस्रनाम स्तोत्र का विधिवत पाठ हुआ। पुरी पीठाधीश्वर के संन्यासी शिष्य स्वामी वनवैभवारण्य के सानिध्य में हुए पाठ के मुख्य यजमान पं.गंगाधर मिश्र रहे। पाठ का प्रतिफल दंडी संन्यासी निर्विकल्पानंद सरस्वती ने बताया। उन्होंने कहा कि इस स्तोत्र का पाठ करने से ब्राह्मणों को ज्ञान एवं विद्या, क्षत्रियों को राज्य, वैश्यों को धन और अन्य को सुख की प्राप्ति होती है। मनुष्य जीवन का मुख्य लक्ष्य जन्म-मरण और अनवरत चल रही शृंखला से मुक्ति पाना है। हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि मनुष्य का जन्म लेना तभी सार्थक है जब उसे पुन: जन्म न लेना पड़े। मृत्यु भी वही सार्थक मानी गई है जिसके बाद पुन: जन्म लेकर मरना न पड़े। इस मुक्ति की प्राप्ति में स्तोत्र पाठ का...