अल्मोड़ा, जून 22 -- सल्ट। मोहान स्थित आईएमपीसीएल के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों और स्थानीय लोगों का आंदोलन 21 वें दिन भी बदस्तूर जारी रहा। इस दौरान लोगों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और निजीकरण का फैसला वापस लेने की मांग की। सोमवार को धरने पर बैठे लोगों ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए। कहा कि कंपनी को कौड़ियों के भाव महज Rs.121 करोड़ में बेच दिया गया, जो सीधे तौर पर एक बड़ा अन्याय है। लगातार करोड़ों रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाने के बावजूद इस सार्वजनिक संस्थान को बेचे जाने से यहां कार्यरत स्थायी, संविदा और आउटसोर्स के करीब 400 से अधिक कर्मियों के सामने रोजगार का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि पहाड़ों में वैसे ही रोजगार के साधन सीमित हैं। ऐसे में आईएमपीसीएल का निजीकरण होने से न सिर्फ कर्मचारियों की रोजी-रोटी छि...