दरभंगा, फरवरी 26 -- जी से डिजिटल होती दुनिया में सोशल मीडिया और मोबाइल गेम्स का प्रभाव बच्चों की दिनचर्या पर साफ दिखाई देने लगा है। जहां पहले शाम होते ही गली-मोहल्लों में क्रिकेट, कबड्डी, गिल्ली-डंडा, कंचा और लट्टू जैसे पारंपरिक खेलों की गूंज सुनाई देती थी, वहीं अब अधिकतर बच्चे मोबाइल स्क्रीन पर रील स्क्रॉल करने और गेम खेलने में व्यस्त नजर आते हैं। इस बदलाव ने न केवल पारंपरिक खेलों की लोकप्रियता घटाई है, बल्कि बच्चों की शारीरिक और मानसिक सेहत को लेकर भी गंभीर चिंताएं पैदा कर दी हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ साल पहले तक मोहल्लों की गलियां बच्चों की किलकारियों और खेलकूद की आवाजों से गुलजार रहती थीं। स्कूल और कॉलेज से लौटने के बाद बच्चे स्वतः ही मैदान या गली में इकट्ठा होकर खेल शुरू कर देते थे, लेकिन अब दृश्य पूरी तरह बदल चुका है। शाम...
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