मोबाइल की स्क्रीन में कैद हो रहा बचपन, गांवों के पारंपरिक खेलों पर गहराता संकट
बलरामपुर, जून 11 -- बलरामपुर, संवाददाता। कभी गांवों की शाम बच्चों की किलकारियों, कबड्डी की हुंकार व गिल्ली-डंडा की खटाखट से गूंजती थी। चौपालों के पास बने खाली मैदानों में बच्चे घंटों खेलते थे। यही खेल उनकी फिटनेस, दोस्ती व सामाजिक जुड़ाव का माध्यम बनते थे। लेकिन बदलते दौर में मोबाइल फोन और ऑनलाइन गेम्स ने बच्चों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल दिया है। अब गांवों के मैदान सूने पड़ते जा रहे हैं और पारंपरिक खेल धीरे-धीरे यादों का हिस्सा बनते नजर आ रहे हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जिले में न्याय पंचायत स्तर पर स्वीकृत 101 खेल मैदानों में से अब तक केवल 54 का निर्माण पूरा हो पाया है। 12 खेल मैदानों पर निर्माण कार्य जारी है, जबकि 35 मैदानों का काम अभी शुरू ही नहीं हो सका है। खेल मैदानों की कमी के कारण बड़ी संख्या म...
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