बागपत, मई 15 -- बागपत। परिषदीय हो या माध्यमिक विद्यालय की कक्षा में हर बच्चा समान गति से नहीं सीखता और पढ़ाई में पिछड़ जाता है। कुछ बच्चों के सीखने, सुनने, देखने या व्यवहार से जुड़ी कठिनाइयां समय पर पहचान में नहीं आतीं। इस समस्या के समाधान के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान व प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने प्रशस्त 2.0 एप विकसित किया है। यह एप शिक्षकों के बच्चों के व्यवहार, सीखने की क्षमता व दैनिक गतिविधियों का व्यवस्थित आकलन करने में मदद करेगी। अधिकारियों का कहना है कि संभावित दिव्यांगताओं की प्रारंभिक पहचान स्कूल स्तर पर ही संभव हो सकेगी। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समय पर उचित सहायता, मार्गदर्शन व प्रमाणन की सुविधा मिलेगी।

स्कूलों में ही पहचान, अब होगी आसान एप के माध्यम से परिषदीय एवं माध्यमिक विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों में 21 प्रकार ...