नई दिल्ली, अगस्त 24 -- दिल्ली हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है मैट्रिमोनियल साइट पर जानबूझकर वैवाहिक स्थिति को गलत तरीके से पेश करना शादी को रद्द करने का एक वैध आधार है। हाईकोर्ट ने कहा कि इस तरह का दमन विवाह की नींव को कमजोर करता है और स्वतंत्र एवं सूचित सहमति के मूल पर प्रहार करता है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की बेंच ने एक व्यक्ति की अपील पर सुनवाई के दौरान 20 अगस्त को यह फैसला सुनाया। याचिकाकर्ता ने फैमिली कोर्ट के जनवरी 2024 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें हिंदू मैरिज एक्ट (एचएमए) के तहत उसकी शादी को रद्द कर दिया गया था। हिन्दुस्तान टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू मैरिज एक्ट की धारा 12(1)(सी) के तहत अगर शादी के लिए सहमति धोखे से ली गई हो, तो पति या पत्नी शादी को रद्द क...
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