दिल्ली, मार्च 31 -- 17 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व अवकाश की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चे के शुरुआती सालों में पिता की अनुपस्थिति को सामान्य नहीं माना जा सकता.बच्चे का पालन-पोषण माता और पिता दोनों की समान जिम्मेदारी है.उच्चतम न्यायालय के फैसले के बाद अब भारत में किसी भी उम्र के बच्चे को गोद लेने वाली महिला को 12 हफ्ते के मातृत्व अवकाश का अधिकार मिलेगा.इसी संदर्भ में सुप्रीम कोर्ट ने पितृत्व अवकाश पर भी अहम टिप्पणी की.जस्टिस जे.बी.पार्दीवाला और जस्टिस आर.महादेवन की पीठ ने कहा कि अब तक, बच्चे की देखभाल में पिता की भूमिका को काफी हद तक नजरअंदाज किया गया है.इसे बदलने की जरूरत है.कोर्ट ने पितृत्व अवकाश को सामाजिक सुरक्षा के रूप में मान्यता देने के लिए कानून बनाने की सलाह दी.अदालत हंसानंदिनी नंदुरी की याचिका पर सुनवाई कर रही थी.नं...
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