मैं बदनसीब...पिता कहलाने का अधिकारी नहीं
रामपुर, मई 21 -- रामपुर। मैं बदनसीब..पिता कहलाने का अधिकारी नहीं, 18 माह से श्रवन कुमार की तरह बेटा करा रहा था इलाज..डायरी में लिखे शब्द जीवन की डोर तोड़ने से पहले लिखे गए थे। डायरी को पढ़ने के बाद हर किसी ने बस यहीं कहा कि निराशा और हताशा या मानसिक तनाव, जिसके चलते सब्र का बांध व धैर्य की डोर टूट गई। यहीं कारण है कि लोगों का जीवन से मोह भंग हो रहा है और खूद ही जिदंगी की डोर को तोड़ रहे है। पुलिस को मिली डायरी में सुनील ने लिखा कि मेरे मन में दुखी होकर बहुत दिनों से आत्महत्या करने के विचार आ रहे है। लाख गुना दुखी हो जाएगा मेरा पीयूष। 18 महीने से श्रवन कुमार की तरह अपनी मम्मी का इलाज करा रहा है और मेरी भी देखभाल कर रहा हैं। ऐसे कब तक वह मेरी और मम्मी की सेवा करता रहेगा। इसलिए में अपनी पत्नी को भी अपने साथ ले जा रहा हूं। मुझे माफ कर देना,अपनी ...
Click here to read full article from source
To read the full article or to get the complete feed from this publication, please
Contact Us.