मेरा बेटा सिर्फ पानी पिलाने गया था...जयपुर अग्निकांड में मां की चीख सुन नम हुईं आंखें
नई दिल्ली, जून 10 -- जयपुर खोह नागोरियान की उस तंग गली में मंगलवार सुबह सिर्फ एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में धमाका नहीं हुआ था, बल्कि कई परिवारों के सपने, उम्मीदें और खुशियां भी राख हो गईं। आग की लपटों ने 8 लोगों की जान ले ली, लेकिन पीछे छोड़ गईं ऐसी चीखें, जिन्हें सुनकर पत्थर दिल इंसान की आंखें भी नम हो जाएं। हादसे के एक दिन बाद जब इलाके में सन्नाटा पसरा था, तब हर घर से सिर्फ मातम की आवाजें सुनाई दे रही थीं। कोई अपने जवान बेटे को याद कर रो रहा था, तो कोई भाई, पति और दोस्त को खोने के गम में टूट चुका था। पूरे इलाके में ऐसा लग रहा था मानो हर घर ने किसी अपने को खो दिया हो।पानी पिलाने गया था बेटा, लौटकर नहीं आया 16 वर्षीय मोहम्मद रब्बिल की मां नाजमीन बानो की आंखें अब भी दरवाजे पर टिकी हैं। शायद उन्हें अब भी उम्मीद है कि उनका बेटा किसी भी पल दरवाज...
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