मेरठ, मई 12 -- 169 साल गुजरने के बाद आजादी की उस पहली लड़ाई को न तो इतिहास भूल पाएगा और नहीं देश के लोग। मेरठ क्रांति के उद्गम स्थल पर क्रांति के पदचिह्न तो अपनी अमिट पहचान के साथ हैं ही, आप भी उस त्याग और बलिदान को महसूस कर सकते हैं। मेरठ को क्रांति की सरजमीं यूं ही नहीं कहा जाता। इसका इतिहास जंग-ए-आजादी में कुर्बानियों से भरा है। अंग्रेजों के खिलाफ काफी पहले से ही लोगों का खून खौल रहा था, लेकिन अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ क्रांति की शुरुआत आज ही के दिन करीब 169 साल पहले यानी 10 मई 1857 को हुई थी। जब देश की स्वतंत्रता के लिए फौजियों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ बिगुल फूंका था। यह भी पढ़ें- गुमनाम क्रांतिकारियों को लोगों तक पहुंचाना सच्ची श्रद्धांजलिआंदोलन की शुरुआत शुरू हुआ यह आंदोलन 15 अगस्त 1947 को देश के आजाद होने तक चला था। हिंदुस्तान का...
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