मेरठ, मई 8 -- खाद्य शृंखला से भूजल और औद्योगिक इकाइयों से सीवेज में पहुंच रहे एंटी बॉयोटिक सूरज की रोशनी में अमोनिया, कार्बन-डाइआक्साइड और कार्बन-मोनो-ऑक्साइड में टूटकर इंसानी खतरा नहीं बनेंगे। एंटी बॉयोटिक से मिले सह-उत्पाद यूरिया सहित विभिन्न पदार्थों के निर्माण में प्रयुक्त हो सकेंगे। चौ. चरण सिंह विवि के भौतिक विज्ञान विभाग ने एंटीबॉयोटिक को वेनेडियम ऑक्साइड और कार्बन नैनो ट्यूब की मदद से सरल एवं गैर-हानिकारक उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया विकसित कर पेटेंट ले लिया है। तकनीक में प्रयुक्त कार्बन नैनो ट्यूब और वेनेडियम ऑक्साइड दोनों गैर-विषाक्त (नॉन टॉक्सिक) पदार्थ हैं। तकनीक पर केंद्रित रिसर्च पेपर अंतरराष्ट्रीय जर्नल एसीएस एप्लाइड मैटेरियल्स एंड इंटरफेस ने भी प्रकाशित किया है। जर्नल का इंपैक्ट फेक्टर 8.5 है. यह भी पढ़ें- पंत विवि की श...